Thursday, April 29, 2021

5100 टेट पास शिक्षामित्रों के लिए बड़ी खुशखबरी, आखिर वही हुआ जिसकी उम्मीद थी shikshamitra latest news hindi

 69 हजार शिक्षक भर्ती : 5100 खाली पदों की भर्ती पर लगा ब्रेक, जानिए क्या है असली वजह


69 हजार शिक्षक भर्ती : 5100 खाली पदों की भर्ती पर लगा ब्रेक, जानिए क्या है असली वजह 


नहीं भेजा खाली पदों का विवरण, फंस गई नियुक्ति; 69,000 भर्ती में दो चरण की काउंसलिंग के बाद भी खाली हैं पांच हजार से अधिक पद



प्रयागराज । प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के लिए 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती में खाली पदों का विवरण बेसिक शिक्षा अधिकारियों की ओर से उपलब्ध नहीं कराने की वजह से तीसरे चरण की काउंसलिंग फंस गई है। पंचायत चुनाव और कोरोना संकट की वजह से सचिव बेसिक शिक्षा अधिकारी के बार-बार निर्देश के बाद भी बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने जिले में खाली पदों का विवरण नहीं भेजा।



दअसल 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती में दो चरण की | काउंसलिंग के बाद पांच हजार से अधिक पद खाली रह गए थे। मंत्री की घोषणा और अपर मुख्य सचिव के निर्देश के बाद सचिव बेसिक | शिक्षा परिषद ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पांच से छह बार खाली पदों का विवरण भेजने का आदेश दिया। लेकिन पहले बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों के पंचायत चुनाव में लगे होने और अब तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण की वजह से खाली पदों का विवरण तैयार नहीं हो सका।


मंत्री की घोषणा के बाद से भर्ती परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद से तत्काल तीसरी काउंसलिंग के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। विभाग में कई अधिकारी कोरोना से संक्रमित हैं, ऐसे में काम धीमा चल रहा है। वहीं बीएसए का तर्क है कि कई विसंगतियों की वजह से खाली पदों का आकलन नहीं हो पा रहा है।



69 हजार शिक्षक भर्ती में तीसरे चक्र की काउंसिलिंग हो पाती तब तक कोरोना ने रफ्तार पकड़ ली। कोरोना के कारण लगभग 5100 पदों पर भर्ती में ब्रेक लग गया है। युवा अब ऑनलाइन काउंसिलिंग की मांग कर रहे हैं। इन पदों पर तीसरे चक्र की काउंसिलिंग से पद भरने की घोषणा मार्च के पहले पखवाड़े में की गई थी। लेकिन विभाग इस दिशा में अभी तक कुछ नहीं कर पाया है। विभाग ने रिक्त पदेां के सही आकलन के लिए जिलों से ब्यौरा मांगा था लेकिन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने अभी तक सूचनाएं नहीं भेजी हैं। विभाग में कई अधिकारी कोरोनाग्रस्त हैं लिहाजा इस दिशा में काम सुस्त है।  





बीते हफ्ते अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए रिक्त पदों के सही आकलन करते हुए प्रमाणपत्र मांगा था। बीएसए ये तर्क दे रहे थे कि विभिन्न विसंगतियों वाले अभ्यर्थियों की वजह से अभी रिक्त पदों का आकलन नहीं हो पा रहा है जबकि मार्च के पहले हफ्ते में ही सारे स्पष्टीकरण जारी कर दिए गए थे कि किन्हें नियुक्ति पत्र देना है और किनका निरस्त करना है। इसके बाद भी कई जिलों के बीएसए नियुक्ति पत्र जारी नहीं कर रहे हैं और अभ्यर्थियों को दौड़ा रहे हैं। इसके कारण रिक्तियों की गणना भी नहीं हो पा रही है।

Tuesday, April 27, 2021

चुनाव ड्यूटी में संक्रमित होकर जान गंवाने वाले शिक्षामित्रों के परिवार को 50 लाख की सहायता की मांग

 चुनाव ड्यूटी में संक्रमित होकर जान गंवाने वाले शिक्षामित्रों के परिवार को 50 लाख की सहायता की मांग



लखनऊ। यूपी प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ ने प्रदेश सरकार से चुनाव प्रशिक्षण व ड्यूटी के बाद मृतक शिक्षा मित्रों के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की है। साथ ही पंचायत चुनाव तत्काल स्थगित करने का आग्रह किया है।





संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ल व सदस्य प्रदेश कार्यसमिति अवधेश मणि मिश्र ने संयुक्त रूप से बताया है कि त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन के दो चरण के चुनाव के बाद सैकड़ों शिक्षा मित्र साथी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। दर्जनों की जान चली गई है। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि चुनाव के दौरान कोविड 19 के गाइडलाइन का पालन नहीं हो रहा है। इसका खामियाजा चुनाव में लगे शिक्षकों, शिक्षा मित्रों व अन्य कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। 



चुनाव प्रशिक्षण से चुनाव संपन्न होने तक हर जिले में सैकड़ों शिक्षामित्र कोविड 19 से संक्रमित हुए हैं। संघ पदाधिकारियों ने सरकार से मृतक शिक्षकों शिक्षा मित्रों व कर्मचारियों के परिवार को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहयोग देने की मांग की है।

Tuesday, April 20, 2021

शिक्षामित्र साथियों को जिस दिन का इंतजार था आखिरकार वो दिन आ ही गया shikshamitra naukari news today extra income

शिक्षामित्र साथियों को जिस दिन का इंतजार था आखिरकार वो दिन आ ही गया shikshamitra naukari news today extra income


 परिषदीय शिक्षकों, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति हेतु आदेश जारी।


अब परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों के लिए भी वर्क फ्राम होम का हुआ आदेश



प्रयागराज : कोरोना को देखते हुए परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को भी वर्क फ्रोम होम के लिए निर्देशित किया है। जो शिक्षक जिला प्रशासन के निर्देश के अनुसार किसी कार्य में लगाए गए हैं वह अपने दायित्व को पूर्ववत करते रहेंगे।



 सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से सोमवार शाम पत्र जारी कर निर्देशित किया कि कक्षा एक से आठ तक के परिषदीय स्कूलों के शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक विभागीय कार्य घर से निबटाएं। यदि किन्हीं कारणों से विद्यालय आना पड़ता है तो कोविड-19 से बचाव संबंधी सभी निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। जिला प्रशासन की ओर से जो ड्यूटी शिक्षकों की लगाई गई है उसका अनुपालन भी अनिवार्य रूप से सभी को करना होगा।






इस संबंध में परिषद सचिव प्रताप सिंह बघेल ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किया है। मंत्री डा. द्विवेदी ने कहा कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्कूलों में शिक्षण कार्य पहले ही बंद कर दिए गए थे लेकिन, वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को भी घर से काम करने की सुविधा दी जा रही है। उन्हें पंचायत चुनाव और अन्य आवश्यक कार्यो में दिए जाने वाले दायित्वों को निभाना होगा।


 परिषद सचिव ने बीएसए को भेजे आदेश में कहा है कि प्रदेश में कक्षा एक से आठ तक के सभी स्कूलों का 30 अप्रैल तक शिक्षण कार्य बंद किए जाने के आदेश दिए गए थे। अब सभी को विभागीय कार्य घर से करना होगा।

Monday, April 12, 2021

तीन साल पुरानी हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट की तैयारी shikshamitra high power cometty report news

तीन साल पुरानी हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट की तैयारी shikshamitra high power cometty report news


 शिक्षामित्रों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध, चार साल से लम्बित मामला निस्तारित न होने से आक्रोश



उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के आह्वान पर धर्मापुर ब्लाक के शिक्षामित्रों ने गुरुवार से अपनी मांगों को लेकर काली पट्टी बांधकर कार्य करना आरंभ कर दिया है। संघ के धर्मापुर ब्लाक अध्यक्ष मोहम्मद अब्बास ने बताया कि 2017 में भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में शिक्षामित्रों की समस्याएं तीन महीने में निस्तारित करने का वादा किया था।







परन्तु सरकार ने चार वर्ष के बाद भी उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। पूरे प्रदेश में एक लाख 76 हजार शिक्षामित्रों में चार हजार से अधिक शिक्षामित्र आर्थिक तंगी और सरकार के रवैए से अपनी जान गवां बैठे हैं। संगठन द्वारा भाजपा के सांसद, विधायक, मंत्री और अधिकारियों तक को तमाम ज्ञापन दिए जा चुके हैं। इसे लेकर संगठन ने निरंतर काली पट्टी बांधकर कार्य करने का निर्णय लिया है। संगठन ने 2018 में उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में बनी हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट लागू करने, शिक्षामित्रों को स्थाई कर उन्हें अध्यापकों के समकक्ष वेतन मानदेय देने, उन्हें प्री प्राइमरी में समायोजित करने, अध्यापकों के समान, अवकाश चिकित्सा व बीमा अन्य सुविधाएं भी देने की मांग उठाई है ।

Sunday, April 4, 2021

शिक्षामित्रों से संबंधित आज की बड़ी खबर देखिए आज की बड़ी खबर shikshamitra news

 बंधुआ मजदूर का जीवन जीने को मजबूर शिक्षामित्र, चार वर्ष बाद भी कोई समाधान नहीं निकाल पाई प्रदेश सरकार



लगभग 20 वर्षों पहले उज्ज्वल भविष्य के सपनों के साथ बेसिक शिक्षा विभाग में पदार्पण करने वाले शिक्षामित्र आज मानसिक और आर्थिक स्थिति में बंधुआ मजदूर का जीवन जीने को विवश हैं। सुप्रीम कोर्ट से समायोजन रद्द होने के उपरांत चार वर्ष बीतने वाले हैं, प्रदेश की लोकप्रिय सरकार के घोषणा पत्र में मात्र तीन माह में न्यायोचित समाधान करने वाली सरकार चार वर्ष बीतने पर भी कोई समाधान नहीं कर सकी।




सुचित मलिक जिलाध्यक्ष शिक्षामित्र- शिक्षक संघ ने बताया कि सैकड़ों बार शिक्षामित्रों द्वारा प्रदेश सरकार से अनुनय- विनय करके भविष्य सुरक्षित करने की मांग की, परंतु सरकार द्वारा प्रत्येक बार केवल एक ही रटा रटाया जबाब 3500 से 10000 मानदेय करने का जुमला सुना दिया जाता है। एक ओर शिक्षामित्रो के जितने भी संगठन और टीमें रहीं वह भी चार सालों में एक मंच से एक सही मांग पत्र भी सरकार को नहीं दे सके और न ही अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने मे कोई कदम उठा सके। आज के परिदृष्य में शिक्षा मित्रों के पास स्वयं भू नेताओं की भीड़ है परंतु कोई भी ऐसा नहीं लग रहा जो शिक्षामित्रों के मान-सम्मान की लड़ाई लड़ने मे सक्षम हो।


अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने का माध्यम केवल धरना-प्रदर्शन ही नहीं होता अपितु सम्मेलनों के माध्यम से भी एकजुटता प्रदर्शित की जा सकती है। प्रदेश का प्रत्येक शिक्षामित्र आज आर्थिक, मानसिक रूप से टूट चुका है और हर वक्त यही सोचता रहता है कि कौन सुनेगा, किसको सुनाये अपनी जीवन की दास्तां।

Thursday, April 1, 2021

शिक्षामित्र साथियों को दो महीने का वेतन तथा होली का बोनस देने की तैयारी shikshamitra maandey news

 शिक्षामित्रों को दो महीने से नहीं मिला मानदेय, बेरंग हो गई होली



उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षा की रीढ़ माने जाने वाले शिक्षामित्र इस बार दो महीने से मानदेय न मिलने से परेशान हैं। सरकार ने सभी कर्मचारियों को होली से पहले वेतन, मानदेय देने का निर्देश दिया था किंतु विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण लगभग एक लाख तीस हजार शिक्षामित्रों को फरवरी और मार्च माह का मानदेय नहीं मिल सका है।




उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिला अध्यक्ष लखनऊ सुशील कुमार यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सभी विभाग के अधिकारियों को निर्देश जारी किया था कि होली के त्योहार से पहले सबको वेतन व मानदेय मिल जाना चाहिए, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते शिक्षामित्रों को फरवरी एवं मार्च माह का मानदेय नहीं मिल पाया है।