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69000 शिक्षक भर्ती: चयन के बाद भी शिक्षामित्रों को मिलेगा मौका, चयन से बाहर शिक्षामित्रों को मौका shikshamitra samayojan news

 69000 शिक्षक भर्ती: चयन के बाद भी खाली रहेंगी सीटें, चयन से बाहर शिक्षामित्रों को मिल सकता मौका


● पहले चरण में ही करीब तीन हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति का इंतजार


● दूसरे चरण में भी अभिलेख भिन्नता वालों को नियुक्ति पत्र नहीं मिलेगा 

बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापक चयन दो चरणों में भी पूरा नहीं हो सकेगा। चयनितों को बड़ी संख्या में नियुक्ति पद देने के बाद भी हजारों पद खाली रह जाएंगे। इसकी बानगी भर्ती के पहले चरण में ही मिल चुकी है, जब कम पद होने के बाद भी करीब तीन हजार सीटें अभी खाली हैं। दूसरे चरण में भी अभिलेख भिन्न वालों को नियुक्ति पत्र नहीं मिलेंगे। इससे नियुक्ति का तीसरा चरण भी संभावित है, जिसमें खाली पद भरे जा सकते हैं।

परिषदीय स्कूलों की भर्ती की शुरुआत ही एक जून को रिक्त पदों से हुई। उस समय 69000 पदों के सापेक्ष 67867 चयनित ही अर्ह मिले थे। शीर्ष कोर्ट के आदेश पर 31661 पदों के लिए 12 अक्टूबर को सूची जारी हुई, तब सिर्फ 31277 पदों पर चयन किया गया, क्योंकि शेष 384 पदों पर एसटी के चयनित उपलब्ध नहीं थे। पहले चरण की काउंसिलिंग में 28320 को ही नियुक्ति पत्र निर्गत हुआ है, करीब एक हजार मामले अभी विचाराधीन हैं। वहीं, तीन हजार पद खाली रह गए हैं।

अब दूसरे चरण की काउंसिलिंग बुधवार से होगी, इसमें कुल 37339 पदों में से 749 के लिए चयनित नहीं मिले इसलिए 36590 पदों की अनंतिम सूची जारी हुई। इसमें भी परिषद का निर्देश है कि जिन चयनितों के मूल अभिलेख और एनआइसी की ओर से जारी सूचनाओं में भिन्नता हों वह प्रकरण मुख्यालय को भेजे जाएं। तय है कि इसमें भी करीब तीन से चार हजार चयनित नियुक्ति पत्र नहीं पा सकेंगे। ये वही अभ्यर्थी जो लंबे समय तक परिषद मुख्यालय के सामने आवेदन के समय के रिकार्ड में संशोधन करने की मांग कर रहे थे, परिषद ने मौका नहीं दिया और कोर्ट भी कुछ को छोड़कर अधिकांश की याचिका खारिज कर चुका है। अब परिषद को ही अंतिम निर्णय करना होगा।

चयन से बाहर शिक्षामित्रों को मिल सकता मौका

भर्ती में दर्जनों ऐसे शिक्षामित्र हैं जिन्होंने आवेदन में शिक्षामित्र का जिक्र नहीं किया और वे अनंतिम सूची से बाहर हो गए। अब रिक्त पदों पर उन्हें मौका दिया जा सकता है। दोनों चरणों के चयनितों का निर्णय एक साथ होने के आसार हैं।

परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत 29 फीसदी सीटों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। सबसे अधिक 45.80 प्रतिशत सीटों पर अन्य पिछड़ा वर्ग ( ओबीसी ) 23.49 प्रतिशत सीटों पर अनुसूचित जाति, जबकि अनुसूचित जनजाति के मात्र .36 (दशमलव तीन छह प्रतिशत) अभ्यर्थियों का सेलेक्शन हुआ है। यानि कुल 69.64 या 70 प्रतिशत अभ्यर्थी आरक्षित जबकि 28.70 फीसदी सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी हैं। 






बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को दिए जवाब में ये तथ्य सामने आए हैं। इस शिक्षक भर्ती में आरक्षण की अनदेखी मामले की सुनवाई आयोग के नई दिल्‍ली कार्यालय में 4 दिसंबर को होनी है। 69000 पदों में 34500 पद अनारक्षित वर्ग के लिए निर्धारित थे। आयोग में दाखिल जवाब के अनुसार सामान्य वर्ग के 19805,ओबीसी के 31605, एससी के 16212 जबकि एसटी वर्ग के मात्र 245 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। 



एसटी वर्ग के पर्याप्त अभ्यर्थी नहीं मिलने के कारण इस कैटेगरी के लिए आरक्षित पदों में से 1133 खाली रह गए। बड़ी संख्या में ओबीसी और एससी वर्ग के अभ्यर्थियों ने हाई मेरिट हासिल की जिससे उनका चयन भी नियमानुसार अनारक्षित वर्ग में हुआ।



68500 की पहली लिस्ट में 62% थे आरक्षित वर्ग के 

इससे पहले 2018 में शुरू हुई 68500 सहायक अध्यापक भर्ती की पहली लिस्ट में 62 प्रतिशत अभ्यर्थी आरक्षित वर्ग के थे। 13 अगस्त को घोषित परिणाम में 41566 अभ्यर्थी सफल हुए थे। तत्कालीन अपर मुख्य सचिव डॉ . प्रभात कुमार ने अपने ट्वीट के माध्यम से जानकारी दी थी कि 41566 अभ्यर्थियों में से 15772 (37 .95 या 38 प्रतिशत) सामान्य, 19168 (46 .12 या 46 प्रतिशत) ओबीसी, 6616 (15.92 या 16 फीसदी) एससी/एसटी वर्ग के अभ्यर्थी थे।

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