यह कोई खबर नहीं है बल्कि खबर से बढ़कर है 


वह जो शिक्षामित्र बंदा है किसी तरह बस जिंदा है|
नाम नौकरी वाला है पर खुद से ही शर्मिन्दा है||
किसी तरह बस जिंदा है........

उम्मीदों का बोझ ढो रहा मन ही मन में वो रो रहा|
देता दिलासा घर भर को पर आशंकित खुद हो रहा|
आशाओं के पंख लगाये उडता हुआ परिंदा है|
किसी तरह बस जिंदा है......

जब अल्प मानदेय पाता था सबके मन को भाता था|
लगन पूर्वक श्रम करता था सबको प्यारा लगता था|
मुख से कुछ न कहता था मन से शिक्षा देता था|
शोषण भी सहता था फिर भी मौन रहता था|
जब आया वक्त फल मिलने का तो हुआ समाज दरिंदा है| |
किसी तरह बस जिंदा है.......

भूल गये शायद वो मंजर जब तम अग्यान का छाया था|
चौपट थी शिक्षा व्यवस्था जब कोई सामने न आया था|
तब शिक्षामित्र ही सामने आया बन के गोविन्दा है|
पर आज किसी तरह बस जिंदा है.......

अब न्यायालय से आस जगी है order ki aas लगी है|
उम्मीदों को पर लगने लगे सपनों के पंछी उडने लगे|
 कृपा ईश की हो जाये हमको न्याय मिल जाये|
बस इसी आस में जिंदा है ....
बस इसी आस में जिंदा है......

1 Comments

  1. Kyo jhuthey news daltey hai es BJP sarkar me kuch nahi hone wala hai

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