उत्तर प्रदेश के 1.60 लाख शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के बैंक खातों में सरकार ने पीएफ जमा करने का कार्य किया आरंभ - Sarkari Khabar

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रविवार, 15 मार्च 2020

उत्तर प्रदेश के 1.60 लाख शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के बैंक खातों में सरकार ने पीएफ जमा करने का कार्य किया आरंभ

उत्तर प्रदेश के 1.60 लाख शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के बैंक खातों में सरकार ने पीएफ जमा करने का कार्य किया आरंभ

प्रदेश के 1.60 लाख शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को मिलेगा पीएफ

मृत शिक्षामित्रों के परिजनों को मिलेगा लाभ समेत पूरे प्रदेश में करीब एक हजार शिक्षामित्रों की मौत हो चुकी है। अब उनके परिजनों को ईपीएफ योजना के लाभ मिल सकेंगे। इंपीएफ के प्रावधान एक अप्रैल 2015 से लागू किए जाएंगे। कानपुर

- त्रिभुवन सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष, उप्र प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ

लखनऊ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय ने दिया आदेश



कानपुर। प्रदेश भर के करीब 1.60 लाख शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को पीएफ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। लखनऊ क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय की ओर से मामले में 28 फरवरी को सुनवाई के बाद जा रहा था। शिक्षामित्रों की ओर से फैसला सुनाया गया है। फैसले में शिक्षामित्रों पर ईपीएफ के प्रावधान लागू होने के आदेश दिए गए हैं। उन्हें एक अप्रैल 2015 से ईपीएफ योजना का लाभ देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, शिक्षामित्रों के संगठन ने 11 मार्च को महानिदेशक स्कूली बीजेपी के खाते ने अटैच कर लिए शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक को पत्र भेजकर आदेश का क्रियान्वयन करने की मांग की है। इसमें कहा था कि ईपीएफ के दरअसल, शिक्षामित्रों पर पीएफ विभाग के नियम एक अप्रैल 2015 से प्रभावी हो चुके हैं। प्रदेश में कहीं भी बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से पीएफ आदि का भुगतान नहीं किया शिकायत के बाद पीएफ विभाग की ओर से बीते एक साल से 7- ए की कार्रवाई की जा रही थी। कानपुर स्थित क्षेत्रीय भविष्य निधि संगठन ने अगस्त 2019 में कानपुर नगर, ने सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक कानपुर देहात, ललितपुर, महोबा के को सभी शिक्षा मित्रों का डाटा एक महीने के भीतर पीएफ विभाग को थे। इसके बाद कानपुर बीएसए ने देने के निर्देश दिए डाटा मिलने के हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई थी। बाद 8 सप्ताह में मामला निस्तारित प्रावधान उन पर लागू नहीं होते हैं। करने को कहा था। साथ ही लखनऊ के पीएफ विभाग को पूरा मामला सुनवाई के बाद दिसंबर 2019 में देखने के निर्देश दिए थे। ब्यूरो हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ की बेंच
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