पीड़ित शिक्षामित्रो के भविष्य को लेकर कड़वी सच्चाई की वास्तविक समीक्षा

*जैसा कि महाविवादित 69000/- शिक्षक भर्ती की निर्णायक बहस दिनांक - 04 दिसंबर को पुनः बहस होने जा रही है जो कि सम्भव है कि अगले निरन्तर पांच - छ: वर्किंग डे पर बहस हो करके फैसला पीड़ित शिक्षामित्रो के पक्ष में रिजर्व हो जाए और दिनांक - 16 दिसंबर को शीर्ष अदालत में भोला प्रसाद शुक्ला व अन्य की याचिका पर निर्णायक बहस भी 124 प्रकरण पर होना है क्योंकि वादी प्रतिवादी दोनों का प्रभावशाली कांउटर व रिज्वांइडर यूयू ललित जी की पीठ में सम्भवतः आ चुका है, जो कि सम्भव है कि प्रभावी बहस होने पर पीड़ित शिक्षामित्रो को कुछ राहत मिल सकती हैं, सभी नानटेट पीड़ित शिक्षामित्र इस समय दिनांक - 08

दिसंबर को सीटेट की परीक्षा को लेकर व 22 दिसंबर को यूपीटीईटी की परीक्षा को क्रैक करने के लिए दिन रात परिश्रम करने के लिए लगे हुए हैं जो कि निश्चित है कि सभी सफल पीड़ित शिक्षामित्रो के लिए भविष्य में उक्त प्राप्त प्रमाण पत्र उनका भविष्य परिषदीय विद्यालयों में सुरक्षित रखने के क्रम में काफ़ी राहत दे सकता है, योगी सरकार अभी तक पीड़ित शिक्षामित्रो के भविष्य को लेकर किसी भी प्रकार का राहत देने वाला निर्णय ले पाने में शत प्रतिशत असफल रही हैं जोकि सम्भव है कि विधान सभा चुनाव 2022 सन्निकट तक मत पाने के लोभ में सम्भव है कि कुछ राहत देने वाले निर्णय ले सकती हैं? फिलहाल अभी तक योगी सरकार ने अपनी हिलाहवाली के कारण पीड़ित शिक्षामित्रो को केवल मौत के सिवाय कुछ भी न देना बेहतर समझा हैं, स्मरण हो कि समायोजन निरस्त होने से अब तक 1700 /- से अधिक पीड़ित शिक्षामित्रो ने आत्महत्या कर ली है और निरन्तर दो से तीन पीड़ित शिक्षामित्र आत्महत्या कर रहे हैं, इसके लिए योगी सरकार ने गतिमान दर्दनाक भयभीत परिस्थितियों को शांत करवाना अभी तक उचित नहीं समझा हैं*? *बहरहाल पीड़ित शिक्षामित्रो के सभी शीर्ष संगठनों का आपसी द्वेष भाव के कारण तमाम खंडों में विभाजित हो जाना एवं योगी सरकार पर अपेक्षित दबाव न बन पाने के कारण बाबा जी की सरकार ने पीड़ित शिक्षामित्रो का निरन्तर शत प्रतिशत शोषण करना बेहतर समझा और आगे भी कोई प्रमाणित खबर नहीं है कि पीड़ित शिक्षामित्रो का भविष्य योगी सरकार सुरक्षित कर भी देगी? क्योंकि जब तक सभी शीर्ष संगठनों का एक मंच पर आ करके योगी सरकार पर पीड़ित शिक्षामित्रो के भविष्य को लेकर फैसला लेने को लेकर शत प्रतिशत दबाव नहीं बनेगा, तब तक सम्भव नहीं लगता है कि बाबा जी के द्वारा राहत देना शत प्रतिशत सम्भव हो सकता है?* उक्त परिस्थिति एवं पीड़ा के साथ *जय महाकाल*

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